रविवार, 19 अगस्त 2012

Ramayan 18

आओ पार्टी-पार्टी खेलें

    आज मुझे मेरे एक फेसबुकिया मित्र पंकज दविवेदी  नें एक मीटिंग के सिलसिले  में बुलाया था। जाकर मालुम पड़ा कि वह श्रीमान जी एक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनकी पार्टी का नाम है, राष्ट्रीय साम्यवादी आर्यन पार्टी, जो मुझे पूर्णतया घोर हिंदूवादी पार्टी लगी। उनके राष्ट्रीय पदाधिकारियों के विचारों का जोश देखकर लगा कि मानों पार्टी बनाना और चलाना अब बच्चों का खेल सा हो गया है। आपस के चालीस पचास यार दोस्त एक जुट  हुए और बन गयी पार्टी। यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब हर मोहल्ले की अपनी एक पार्टी होगी। वास्तव में कुछ लोग पार्टी बनाना और चलाना बहुत आसान काम  समझते हैं। मैं पंकज जी व उनकी टीम को हतोत्साहित नहीं करना चाहता, परन्तु इतना जरुर कहना चाहता हूँ कि पार्टी बनाना जितना आसान है, चलाना उतना ही कठिन।आप सब क्या सोंचते हैं? अपनें विचार अवश्य रखें। 
आपका अपना-
 सुशील अवस्थी "राजन" मोबाइल -9454699011

शुक्रवार, 17 अगस्त 2012

अखिलेश और माया सरकार में कोई खास फर्क नहीं

     उत्तर प्रदेश की जनता नें बड़ी आस और उम्मीदों से बहुजन समाज पार्टी के स्थान पर समाजवादी पार्टी की सरकार स्थापित की थी, लेकिन माया सरकार और अखिलेश सरकार के कामकाज में कोई खास फर्क नहीं नज़र आता है। माया सरकार के लुटेरे IAS अधिकारी प्रदीप शुक्ल को दोनों सरकारें एक जैसा ही संरक्षण प्रदान कर रही हैं। मूर्तियों की स्थापना को जो समाजवादी पार्टी निरर्थक कार्य बताया करती थी, खुद उसनें ही मायावती की मूर्ति स्थापना में जो तत्परता दिखाई, वह तो तत्परता तो माया सरकार में भी नहीं थी। माया सरकार के अनेंकों घोटालों को एक समय खोलनें में लगी रही अखिलेश सरकार प्रदेश की जनता को यह बता पानें में आज भी अक्षम है कि कितनें घोटालेबाजों को सजा मिली। 

रविवार, 5 अगस्त 2012

पीएम पद की रेस से मोदी बाहर


    नई दिल्ली। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन [एनडीए] में प्रधानमंत्री पद को लेकर खींचतान तेज हो गई है। अभी तक इशारों ही इशारों में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने का विरोध करने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब खुलकर मोदी के खिलाफ उतर आए हैं। नीतीश ने भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी से आश्वासन मागा है कि मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार न बनाया जाए। बताया जाता है कि नीतीश और गडकरी की 25 जुलाई को गुप्त बैठक हुई थी।
गडकरी ने नीतीश को भरोसा दिया है कि एनडीए में विचार-विमर्श के बाद ही प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार पर फैसला होगा। गडकरी ने भी इस बात की पुष्टि की है कि नीतीश के साथ मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार पर चर्चा हुई थी। गडकरी ने बताया कि एक हफ्ते पहले दिल्ली में बैठक हुई थी। बैठक के दौरान बताया गया कि भाजपा ने अभी पीएम पद को लेकर कोई फैसला नहीं किया है। नेतृत्व पर फैसला अभी जल्दबाजी होगी। जब कभी फैसला लेंगे, उससे पहले एनडीए में शामिल दलों से विचार-विमर्श जरूर किया जाएगा।

शनिवार, 4 अगस्त 2012

"राजनैतिक विकल्प"

   अन्ना के भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन के "राजनैतिक विकल्प" परिवर्तन नें आजकल मेरे मन मष्तिष्क व्यग्र कर रखा है। मन पूंछ रहा है की क्या अन्ना और उनकी टीम नें ऐसा कर उचित किया या अनुचित ? यदि अन्ना आन्दोलन राजनैतिक दल बना तो क्या भारतीय जनता वोट से भी उनकी मदद करेगी ? क्या अन्ना पार्टी भारतीय राजनीती के अखाड़े में धनबल, बाहुबल, जातिबल, धर्मबल, अपराधबल के दम पर टिकी हमारी राजनैतिक पार्टियों का सामना कर सकेगी?
   किसी भी आन्दोलन का राजनैतिक हो जाना कोई गैर क़ानूनी कार्य तो नहीं ? अगला सवाल राजनैतिक सफलता या असफलता की अटकलों पर आधारित है, हो सकता है की अन्ना का राजनैतिक विकल्प का प्रयास असफल ही साबित हो जाये, तो क्या इसी भय से कोई सकारात्मक कार्य करनें से बचा जाय । यूँ तो दीपक पर सदा रात भारी रही, पर उजाले के लिए जंग जारी रही" तर्ज़ पर क्या हमें अन्ना और उनकी टीम का समर्थन नहीं करना चाहिए ? 

गुरुवार, 2 अगस्त 2012

अन्ना की राजनैतिक पार्टी

   अन्ना हजारे के लोग शीघ्र हम आपसे वोट मांगते नजर आयेंगे। संभावना ऐसी है की 2014 के लोकसभा चुनाओं में ही हमें एक नयी राजनैतिक पार्टी का विकल्प मिल जाये। आज जंतर-मंतर से अन्ना टीम नें देशवासियों से नयी राजनैतिक व्यवस्था के लिए राय मांगी है। इससे लगता है की अन्ना टीम राजनैतिक पार्टी बनानें को लेकर एकमत हो चुकी है, बस जनता की मांग के नाम पर उसको स्थापित करनें की औपचारिकता का निर्वहन करना मात्र शेष है।
    इसमें कोई दो राय नहीं है, की अन्ना की पार्टी चल निकलेगी। देश की वर्तमान राजनैतिक पार्टियों से लोगों का मोहभंग हो चूका है, यह आज का सबसे बड़ा राजनीतिक सच है। यही मोहभंग अन्ना और उनकी पार्टी को आसानी से सत्ता सिंहासन पर विराजमान करा सकता है। वैसे भी यही राजनैतिक ट्रेंड चल रहा है की, जिससे ऊब जाओ उसको हटाओ भले ही जिसको लाओ वह सत्ता के लायक हो या न हो। जैसे माया से ऊबी यूपी की जनता अखिलेश को ले आयी, भले ही वह माया सरकार के एजेंडे पर काम करें। माया मूर्तियाँ स्थापित कर रही थी अखिलेश भी माया की मूर्तियाँ स्थापित करनें लगे।
    

अनशन खत्म करें टीम अन्ना : अनुपम


  नई दिल्ली। फिल्म अभिनेता अनुपम खेर ने भी अन्ना हजारे से अनशन तोड़ने की अपील की है। गुरुवार को जंतर-मंतर के मंच पर पहुंचे अनुपम खेर ने टीम अन्ना से अनुरोध किया है कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए इन सबको अपना अनशन खत्म कर लेना चाहिए, वरना हालात और बेकाबू हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ना हम सबका फर्ज है।
गौरतलब है कि टीम अन्ना के नौ वां दिन है और टीम अन्ना का हौसला बढ़ाने के लिए मंच पर अभिनेत्री अचर्ना चौधरी भी पहुंच गई है। जहां एक तरफ अनशनरत केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, गोपाल राय की तबीयत बिगड़ती ही जा रही है। ऐसे में दिल्ली पुलिस ने उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दे डाली है।
बीती रात पीएम व यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के घर के बाहर प्रदर्शनकारी अन्ना समर्थकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

योगी का एक मंत्री.. जिसे निपटाने के लिए रचा गया बड़ा षडयंत्र हुआ नाकाम

  सुशील अवस्थी 'राजन' चित्र में एक पेशेंट है जिसे एक सज्जन कुछ पिला रहे हैं। दरसल ये चित्र आगरा के एक निजी अस्पताल का है। पेशेंट है ...